श्री कृष्ण जन्मास्टमी की सभी को हार्दिक शुभ कामना ..
प्रतीक्षा
हजारों आखें बिछाये वो राह तक रही थी
अब मेरे घर बालगोपाल जनम लेंगे ,
वो मंगल मन रही थी
वो मंगल मन रही थी
गुदगुदाती कुनमुनाती रातों के तारों के बीच
वो मन्नतें मांग रही थी
वो मन्नतें मांग रही थी
आज गहरी उमड़ती सांसों के बीच ,
ललाट पे उमड़ते जल कणों को ,
वो बार -बार अपने आँचल मे संजो रही थी .
ललाट पे उमड़ते जल कणों को ,
वो बार -बार अपने आँचल मे संजो रही थी .
नारी ने ही नारी को जनम दिया ,
अब वो अपना दरद छुपा रही थी.
अब वो अपना दरद छुपा रही थी.
नीरा भसीन

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें