शनिवार, 13 अगस्त 2011
रविवार, 7 अगस्त 2011
मित्रता दिवस
मित्रता दिवस
आज ७ अगस्त है .अंतर राष्ट्रीय मित्रता दिवस .रीति नै ही सही पर ऐसे दिवस जिन्हें हम मदर'स डे या फादर'स डे के नाम से जानते है उनका आज के समाज मे एक महत्वपूरण स्थान है .युगों से चली आ रही वो प्रथाएं जिन्हें हम युगों से मानते आ रहे है और असंख्य युग पुरुषों के नाम से मनाते आ रहे है ,धीरे धीरे अब वो दृष्टिकोण बदल रहा है . हमारे विचार जितनी तेजी से संकुचित हो रहे है उतनी ही तेजी से हम अपने आस पास के जीवन मे ही खुशियाँ तलाश करने लगे है .दीवाली दशहरे ,गणेश चतुर्थी या जनम अष्टमी का त्यौहार हो कभी पूरा समाज एक साथ मिल कर मनाया करता था .सभी लोग एक स्थान पर एकत्रित होते थे ओर उस अवसर विशेष के महत्व की चरता करते थे .सांस्कृतिक मूल्यों एवं संस्कारों अदन प्रदान कर मानवीय संबंधों को मजबूत बनाते थे .येही त्यौहार आज भी मनाये जाते है पूजा के नाम पर ढेरों चंदा इकठा किया जाता है .इस आडम्बर की होड़ का लुत्फ़ भी लोग मजे ले ले कर उठाते है ,पर श्रधा कहीं नहीं दिखाई देती .एक दुसरे की होड़ मे त्योहारों का आयोजन होता है .पूजा के समाप्त हो जाने पर कचरे के ढेर गली कुचों मे बिखरे लोगों की श्रधा को श्रधांजलि दे रहे होते है .क्योंकि बीती रात आयोजित समिति के लोग अपनी थकन मिटने के लिए कुछ और ही आयोजन कर किसी कवी की कल्पना की कल्पना को सच कर रहे होते है "बीती ताहि बिसर दे आगे की सुध ले"..
बात देसी चलन की हो या विदेशी चलन की उद्येश तो सबका एक ही है भाई चारे की भावना मदर'स डे किस तरह या फिर मित्रता दिवस मकसद तो ये है की किस तरह आपसी संबंधो को बाद्य जाये और पारिवारिक एकता को कायम रखा जाये .भारत मे भाई दूज हो या राखी ऐसे ही संबंधो की एक कड़ी है इसके पीछे की भावना भी पारिवारिक सम्बन्ध ही है .एक लड़की विवाह के बाद जब अपनी घर गृहस्थी मे व्यस्त हो जाती है अपने जीवन की ऊँची नीची राहों को पर करती अपने आप को पित्र गृह से जोड़े रखती है उसके पीछे ये बंधन ही है जहाँ पिता और भाइयों के सस्नेह आश्वासन ने सदा ही सुरक्षित रखा है .एक दुसरे के लिए शुभ कामनाएं परिवार के संबंधों को मजबूत बनाती है.

यदि ऐसे मे हम भी कुछ नए अवसरों को भारत मे ले आये है तो इसे विदेशियों की नक़ल आदि कह कर अपने को छोटा नहीं बनाना चाहिए .इससे तो समाज मे खुशियाँ बड़ाई व बांटी जा सकती है..
'मित्रता दिवस' मेरे विचार से बहुत महत्व पूर्ण दिन है .मित्रता दो आम लोगों के बीच ही नहीं पति पत्नी ,माँ बेटी ,पिता पुत्र बहनों बहनों मे,भाई भाई मे या फिर एक देश से दुसरे देश की ,भी तो हो सकती है .एक बात और धयान देने योग्य है हम जो भी दिन मानते है या किसी दिवस विशेष पर रिश्तों को मान सम्मान देते है वो सब किसी धरम विशेष का बंधन नहीं होता है वो एक भावुक बंधन है कियोंकि ये तो मन के बधन है .बस जरुरत है तो एक नई सोच को अपनाने की ,जिंदगी को जिंदगी के साथ जीने की .ये भावनाए हमारी है आपकी है हम सब की है
नीरा भसीन
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