रविवार, 24 जुलाई 2011

हमारी युवा पीड़ी..

  हमारी युवा पीड़ी..


                जनम से ले कर मृत्यु तक मनुष्य कई अवस्थाओं से गुजरता है और उसकी हर अवस्था का एक दायित्व होता है जिसका उसे निर्वाह भी करना होता है. ये दायित्व   हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है जिसमे देश कालऔर स्थान के हिसाब से परिवर्तन होते रहते है .पर उनके मूल  भाव सदा एक से रहते है .इन  दायित्वों  के पालन से ही परिवार ,समाज ,गाँव ,शहर देश और यहाँ तक की पूरा विश्व सुचारू  रूप से चलता है .



                                                     ज्यों ज्यों विदेशी ताकतें भारत मे अपने पाँव जमाती गईं त्यों त्यों भारत वासी धार्मिक,शैक्षिक और राजकीय त्रासता का शिकार होते गए .ये सब पलक झपकते नहीं हुआ अपितु इस प्रक्रिया मे सेकड़ों वर्ष लग गए.भारतवासी अपनी संस्कृति अपना धर्म,अपने रहन सहन अपनी भाषा, अपना विवेक और यहाँ तक की अपने खान पान को भी भूल कर श्री हीन हो गए थे .तब देश को विदेशी सत्ता के हाथों से निकलने के लिए सारे देश के युवा  जाति पाति ,भाषा और प्रांतीय मतभेदों को भुला कर एक जुट हो कर स्वतंत्रता संग्राम मे शहीद हो रहे थे .इन्ही दिनों स्वामी विवेकानंद ,राजा राम मोहन रॉय और स्वामी दयानंद जेसे महान पुरषों ने उन्हें भारत की मूल संस्कृति व वेदांत के दर्शन कराये .कवियों की लेखनी भी पीछे नहीं रही .तुलसीदास कृत रामचरित मानस घर घर पड़ी और गाई जाने लगी.ऐसे ही अन्य ग्रन्थ दूसरी भाषाओँ मे भी लिखे गए जिससे देश के कोने कोने के युवा प्रदीप्त हो उठे.देश स्वतंत्र हुआ पर यह केसा परिवर्तन था  जिसमे युवाओं के होश खो गए .सांस्कृतिक धरोहर कुछ मुठी  भर लोगों के हाथ मे रह गई बाकि लोग विकास के नाम पर विनाश की ओर चल पड़े. आज जितने युवा लोगों की भीड़ बिन बुलाये जुआ घरों मे ,सिनेमा घरों मे ओर शराब की दुकानों मे दिखाई देती है उतनी बुलाने पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों ,समारोहों ,या  समाज के उत्थान के कार्यक्रमों मे नहीं दिखाई देती.शिक्षा भी केवल भौतिक सुखों को जुटाने का साधन मात्र रह गई है.हमें बैठकों या चोरहों पर खड़े हो कर सत्ता को दोष मात्र देने से कर्त्तव्य मुक्ति नहीं मिल सकती.हमें बुराई के बीज को ढूँढना  होगा .

                                          
      सदा से युवा पीडी समाज सुधर करती आई है आज भी करना होगा .समाज मे फेली हर बुराई को दूर करने का बीड़ा उठाना होगा .अब चाहे वे बुराइयाँ देहिक हों ,देविक हों ,सामाजिक हों ,मानसिक हों ,भौतिक हों  या फिर राजकीय हों .    आज काल के युवकों को हम शिक्षा तो दे रहे हैं  पर दिशा नहीं .आज युवकों को सही दिशा का ज्ञान ,अपने कर्तव्यों का ज्ञान ,अपनी सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीडी के उत्तरदायित्व को उठाने का ज्ञान सुचारू रूप से होना बहुत आवश्यक है.जब महाभारत के कुरुक्षेत्र मे अर्जुन कर्त्तव्य  विमुख हुआ तो कृष्ण ने उसेसामयिक  कर्त्तव्य पालन का उपदेश दे कर गीता जेसे ग्रन्थ की रचना कर डाली और कर्त्तव्य का महत्व समझाया  समय की यही मांग थी की अर्जुन सारे रिश्ते नाते और स्वार्थ को भूल कर एक धरम्पूर्ण राज्य की स्थापना करे ,फिर उसके लिए महाभारत जेसा युद्ध ही क्यों न करना पड़े .


             श्री रामकृष्ण ने भी विवेकानंद से यही कहा था की निर्विकल्प समाधी की साधना कर स्वार्थी न बनो ,देश की पुकार सुनो ,लोगों को वेदांत का ज्ञान दो तो तुम्हारी मुक्ति निश्चित है .और हम सभी जानते  है की किस तरह स्वामी विवेकानंद ने हिन्दू धर्म का और युवा शक्ति का परिचय पूरी दुनिया को दिया .तुलसीदास जी ने हाथ मे माला ले कर जप नहीं किया अपितु रामचरित मानस जेसे ग्रन्थ की रचना कर सारे देश का सही मार्गदर्शन किया .इस ग्रंथ्मै यह स्पष्ट है की भौतिक   प्रगति के साथ साथ अध्यात्मिक प्रगति भी अति आवशयक है नहीं तो देश का विकास तो रुकता  ही है साथ ही साथ मनुष्य का मानसिक पतन भी होने लगता है .हर माता पिता से आग्रह है की वे अपनी संतान को उचित संस्कार दें और उन्हें वीर धीर और कर्त्तव्य निष्ठ  बनाये हमारी युआ पीडी ही हमारे देश का आधार स्तम्भ  है..  इतिश्री..  

                                                                                      नीरा  भसीन

मेरी माँ...


मेरी माँ..


 
मुझे न बांधो तुम आँचल में 
                            मै पंख फैलाना चाहूँ गगन में..
        मुझे न बाँधो तुम पलकों में          
                                          मैं विश्व संजोना चाहूँ नैनो मैं..
                              मुझे न थामो तुम हाथों मैं
                                         मैं तारों को भरना चाहूँ मुट्ठी में..
                             मेरे कदमों को न रोको मेरी माँ
                                         मै लिख दूंगी अपना नाम गगन में..
                                      जहाँ से सूर्य उदय होता है...

 
                                                                                                                                   नीरा भसीन.