जननी तुम कहाँ हो
माँ बाप धन्य हुए जब बेटी की शादी
एक आई -टी इंजिनीयर के साथ हुई
लाडों में पली ,नाजों मे ढली
घर की रोनक आज पराई हुई
माँ ने दान दहेज़ दे कर बेटी को ससुराल बिदा किया था ,
सास ने आशीर्वादों के साथ अपना बेटा दे कर
घर की लक्ष्मी को परदेस विदा कर दिया
नया घर ,नयी जिंदगी ,ओउर हुआ एक नया सवेरा ,
"उठो जल्दी करो ,नाश्ता दो काम पर जाना है "
कल तक जब भी सबेरा हुआ तो माँ ने कहा था
चल बिटिया जल्दी से नाश्ता कर ले
नहीं तो ठंडा हो जायेगा .........
जननी तुम कहाँ हो
अभी कल की ही तो बात है
अलमारी मे ठूंस ठूंस कर भरे कपडे देख कहा करती थी
"माँ क्या पहनू कुछ भी ढंग का नहीं है "
आज डिब्बों मे मिर्च मसाले ढूंड रही हूँ

जननी तुम कहाँ हो
वो दिन कितने सुहाने थे
जब जी चाह तब सो कर उठते थे ,
मन ने जो चाह जिद कर के पा लेते थे
पर वो सब कल की बातें है
अब बिखरे पेपर ,चाय के खाली कप
बेतरतीब पड़े स्लीपर और भीगा तोलिया
घर मे बिखरे पड़े हैं -----ये क्या मुसीबत है?
जननी तुम कहाँ हो --------?
आज मेरे अ न्दर भी एक जीवन पल रहा है
मुझे याद आती है तुम्हारी वो मुस्कराहट
जो सदा मुझे कुछ सिखा जाती थी
याद आता है तेरा वो स्पर्श जो सदा
मेरा हौसला बड़ा जाता था
कल मै भी जननी कहलाऊंगी
पर मेरी जननी तुम कहाँ हो
नीरा भसीन
माँ बाप धन्य हुए जब बेटी की शादी
एक आई -टी इंजिनीयर के साथ हुई
लाडों में पली ,नाजों मे ढली
घर की रोनक आज पराई हुई
माँ ने दान दहेज़ दे कर बेटी को ससुराल बिदा किया था ,
सास ने आशीर्वादों के साथ अपना बेटा दे कर
घर की लक्ष्मी को परदेस विदा कर दिया
नया घर ,नयी जिंदगी ,ओउर हुआ एक नया सवेरा ,
"उठो जल्दी करो ,नाश्ता दो काम पर जाना है "
कल तक जब भी सबेरा हुआ तो माँ ने कहा था
चल बिटिया जल्दी से नाश्ता कर ले
नहीं तो ठंडा हो जायेगा .........
जननी तुम कहाँ हो
अभी कल की ही तो बात है
अलमारी मे ठूंस ठूंस कर भरे कपडे देख कहा करती थी
"माँ क्या पहनू कुछ भी ढंग का नहीं है "
आज डिब्बों मे मिर्च मसाले ढूंड रही हूँ

जननी तुम कहाँ हो
वो दिन कितने सुहाने थे
जब जी चाह तब सो कर उठते थे ,
मन ने जो चाह जिद कर के पा लेते थे
पर वो सब कल की बातें है
अब बिखरे पेपर ,चाय के खाली कप
बेतरतीब पड़े स्लीपर और भीगा तोलिया
घर मे बिखरे पड़े हैं -----ये क्या मुसीबत है?
जननी तुम कहाँ हो --------?
आज मेरे अ न्दर भी एक जीवन पल रहा है
मुझे याद आती है तुम्हारी वो मुस्कराहट
जो सदा मुझे कुछ सिखा जाती थी
याद आता है तेरा वो स्पर्श जो सदा
मेरा हौसला बड़ा जाता था
कल मै भी जननी कहलाऊंगी
पर मेरी जननी तुम कहाँ हो
जीवन ऐसे ही आगे बढता है .
पर परिवार तो बिखर ही रहे हैं
फिर भी जननी तुम धन्य हो..
पर परिवार तो बिखर ही रहे हैं
फिर भी जननी तुम धन्य हो..
सभी रिश्तों से भिन्न हो..
बिखरते परिवारों को जोड़ने का तुम्हारा काम जारी है..
हाँ जननी इसी का नाम तो नारी है..
नीरा भसीन


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