गुरुवार, 7 जनवरी 2016

रुपया..

          


















यह सही है कि तुम कचरे मे नहीं जाते
तुम तो हम सब की जेबों में  समाते हो ,

जेबें भी ऐसी जो पड़ जाती है  छोटी
ईछांय हैं ऐसी जो मांगे रकम मोटी मोटी ,

दुर्गम राहें ,दुर्लभ संचय ,
मन को ठंडक दिल को संशय।

हर कोई चल रहा है तेरी राह पर
खा खा के ठोकरें
एक जीवन में सात जीवन जीने की चाह
मन मे भर भर कर।

तुम वादा  करो हमारे साथ साथ रहोगे
चाहे दुनिया छूट जाये
पर तुम साथ न छोडोगे

मेरा दाता भी तू मेरा विधाता भी तू ,
मेरी माता भी तू ,मेरी विमाता भी तू ,
मेरा पिता भी तू ,मेरा पुत्र भी तू
मेरी बीबी भी तू मेरी बहन बेटी तू ,
जो बिना कर्म किये मिले ऐसा धर्म भी तू ,

मेरी पलकों की छाँव में सदा  बसे
ऐसा सुनहरा हरा गुलाबी सपना है तू
तू मेरे पास है
मेरी जिंदगी कुछ खास है
आज तू मेरे पास है
कितना सुखद अहसास है

कुछ और रहे न रहे
पर तू मेरे पास है
कितना सुखद अहसास है



                                                                                             












                                                      नीरा भसीन ( १९-१२-२०१५ ) हैदराबाद 

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