" बिटिया ने कहा "
प्यारी माँ मैं नमन करूँ यां कोसूं अपने भाग्य को
बेटी बनकर आई , फिर भूली बेटी के सम्मान को
तुम स्वयं धरा पर बेटी बन के आईं
फिर मेरे जनम पर आंसू बहाती हो क्यों ?
तुमने अपनी माँ के' आंचल' मे खूब आंख -मिचोली खेली होगी
फिर मुझसे अपना' आंचल' छुड़ाती हो क्यों..
तुम्हारी माँ ने तुम्हे सीने से लगा' बालाएं' तो उतारी होंगी
फिर मेरे जन्म लेने पर मुझे' बला' समझती हो क्यों..
एक जननी ही दूसरी जननी को जनम दे कर
परमपिता परमेश्वर की रीति का निर्वाह करती है
तो फिर मेरे आस्तित्व का' दिया' बुझाने ,
तुम प्रभु के द्वार' दिया' जलाती हो क्यों..
माँ मैं तेरा अंश ही नहीं, जीवित सा स्वरुप भी हूँ
अपनी होकर भी , फिर तुम मुझसे पिंड छुड़ाती हो क्यों..
मंगलवार 29/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
जवाब देंहटाएंआप भी एक नज़र देखें
धन्यवाद .... आभार ....
जी बहुत बहुत धन्यवाद.. स्नेह बनाए रखें..
हटाएंसुन्दर रचना .....
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद.
हटाएंखुबसूरत सटीक रचना
जवाब देंहटाएंनई पोस्ट सपना और मैं (नायिका )
जी धन्यवाद.. मार्गदर्शन देते रहें..
हटाएंबहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति......
जवाब देंहटाएंधन्यवाद.. स्नेह बनाए रखें..
हटाएंप्रयास किया है.. समय समय पर मार्गदर्शन देते रहें..
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