मेरी माँ..
मुझे न बांधो तुम आँचल में
मै पंख फैलाना चाहूँ गगन में..
मुझे न बाँधो तुम पलकों में
मैं विश्व संजोना चाहूँ नैनो मैं..
मुझे न थामो तुम हाथों मैं
मैं तारों को भरना चाहूँ मुट्ठी में..
मेरे कदमों को न रोको मेरी माँ
मै लिख दूंगी अपना नाम गगन में..
जहाँ से सूर्य उदय होता है...
नीरा भसीन.
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